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टिप टिप गिरता पानी
बूंद-बूंद से बनता सागररुपये-रुपये से बनता घररोज़ टिप-टिप गिरती बूंदें, बहती महासागर मेंरोज़-रोज़ बीज बोते, बनते बड़े पेड़ एक रुपया ज्यादा नहीं लगतामटके भर रुपये, हज़ार बीज देतेरोज़ बचाओ पेड़, एक दिन बनेगा पहाड़पहाड़ों पहाड़ बनाओ, चढ़ो चोटी पे एक सिक्के की कीमत, ज्यादा नहीं लगतीसुनो मटके में गिरते हुए, वो है पहाड़ की गूंजटिप-टिप…